धीरेंद्र शास्त्री की 60 हज़ार की जैकेट पर मचा बवाल, बोले- अगली बार 1.20 लाख की पहनूंगा

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हाल ही में बागेश्वर धाम सरकार के नाम से प्रसिद्ध पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार चर्चा उनके किसी प्रवचन या चमत्कार की नहीं, बल्कि उनके पहनावे की हो रही है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें धीरेंद्र शास्त्री 60 हज़ार रुपये की महंगी जैकेट पहने नजर आए। इसके बाद इंटरनेट पर लोगों ने उन्हें जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया। कई लोगों ने यह सवाल उठाया कि एक आध्यात्मिक गुरु को इतने महंगे कपड़े पहनने की क्या आवश्यकता है।

ट्रोल्स ने धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना करते हुए कहा कि जो व्यक्ति धर्म और सादगी की बात करता है, उसे खुद भी उसी राह पर चलना चाहिए। लोगों ने कमेंट्स में लिखा कि अगर वे सादगी की शिक्षा देते हैं तो खुद को भी सादा जीवन अपनाना चाहिए। कुछ यूज़र्स ने यह तक कह दिया कि धर्म के नाम पर पैसा कमाकर ऐशो-आराम करना आस्था के साथ खिलवाड़ है।

बाबा बागेश्वर धाम सरकार, अर्थात धीरेंद्र शास्त्री, एक बार फिर चर्चा में हैं – इस बार उनके प्रवचनों या चमत्कारों को लेकर नहीं, बल्कि उनकी पहनी गई एक महंगी जैकेट को लेकर। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने एक डिजाइनर जैकेट पहनी, जिसकी कीमत 60 हज़ार रुपये बताई जा रही है। जैसे ही उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।

कुछ लोगों ने इसे एक धार्मिक व्यक्ति के लिए अनुचित बताया, तो कुछ ने सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना करते हुए कहा कि जो व्यक्ति साधु-संत की छवि में रहता है, उसे सादगी अपनानी चाहिए। लेकिन वहीं उनके समर्थकों ने तर्क दिया कि अगर कोई धर्मगुरु अच्छे कपड़े पहनता है तो उसमें बुराई नहीं है, खासकर जब वो खुद अपने खर्च से पहन रहा हो और किसी से मांग नहीं रहा।

इस पूरे विवाद के जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने भी तीखा लेकिन स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा, “अगर 60 हज़ार की जैकेट पर इतना बवाल मच रहा है, तो अगली बार मैं 1.20 लाख की जैकेट पहनूंगा।” इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं और भी तेज हो गईं। कुछ लोगों ने इसे बाबा की अहंकारपूर्ण प्रतिक्रिया बताया, तो कुछ ने कहा कि यह आत्मविश्वास और खुलेपन की मिसाल है।

धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि धर्म का मतलब यह नहीं है कि इंसान फटे पुराने कपड़े पहने। उन्होंने यह भी बताया कि वे कोई संन्यासी नहीं हैं, बल्कि एक कथावाचक और समाजसेवी हैं, और जैसे किसी भी आम इंसान को अच्छा पहनने का हक है, वैसे ही उन्हें भी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने वह जैकेट खुद के पैसों से खरीदी थी, किसी भक्त से नहीं ली।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस खड़ी कर दी है कि क्या धार्मिक नेताओं को भौतिक सुख-सुविधाएं अपनाने का हक है? एक ओर जनता की अपेक्षाएं होती हैं कि धार्मिक व्यक्ति सादा जीवन जिए, तो दूसरी ओर ऐसे संत या कथावाचक आज के समय में एक सार्वजनिक हस्ती बन चुके हैं, जिनकी शैली, पहनावा और जीवनशैली भी एक मैसेज देती है।

धीरेंद्र शास्त्री की इस प्रतिक्रिया से यह साफ हो गया कि वे आलोचनाओं से डरने वाले नहीं हैं और अपने तरीके से ही काम करते हैं। उनका यह बयान न केवल विवादों को हवा दे रहा है, बल्कि एक बड़ी सोच को भी चुनौती दे रहा है – कि क्या धर्म और आधुनिकता साथ-साथ चल सकते हैं? इस सवाल का जवाब समय ही देगा, लेकिन फिलहाल धीरेंद्र शास्त्री की 60 हज़ार की जैकेट और 1.20 लाख की धमकी सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रही है।


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