प्रसिद्ध न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी जी का आभार, जिन्होंने “बिहार अस्मिता दिवस” में आकर श्रद्धेय रामविलास पासवान जी को श्रद्धांजलि दी।
पटना के ऊर्जा स्टेडियम में “बिहार अस्मिता दिवस” के अवसर पर एक भव्य समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश से कई विशिष्ट हस्तियों ने शिरकत की। यह आयोजन बिहार की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक चेतना और ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया था। इस अवसर पर बिहार के गौरव, सामाजिक न्याय के प्रबल पक्षधर और जनता के प्रिय नेता श्रद्धेय रामविलास पासवान जी की जयंती भी मनाई गई। इस विशेष आयोजन में मशहूर न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी जी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ा दी।
चित्रा त्रिपाठी जी ने न केवल कार्यक्रम में भाग लिया, बल्कि अपने शब्दों में रामविलास पासवान जी के योगदान को याद कर सबके दिलों को छू लिया। उन्होंने अपने भाषण में बताया कि कैसे रामविलास पासवान जी ने हमेशा वंचितों, पिछड़ों और गरीबों की आवाज को बुलंद किया और उन्हें समाज में सम्मान दिलाने का कार्य किया। उनकी उपस्थिति न केवल एक मीडिया प्रतिनिधि के रूप में थी, बल्कि एक संवेदनशील नागरिक के रूप में थी, जो बिहार और उसके महान नेताओं के प्रति आदरभाव रखती हैं।
बिहार अस्मिता दिवस के मंच से चित्रा त्रिपाठी जी ने जो भावनात्मक और सशक्त वक्तव्य दिया, उसने न केवल कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को भावुक किया, बल्कि सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में भी व्यापक चर्चा प्राप्त की। उन्होंने यह दर्शाया कि मीडिया केवल खबरें दिखाने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज के प्रति एक नैतिक जिम्मेदारी भी निभाता है।
उनकी सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि बिहार की अस्मिता केवल राजनेताओं या बुद्धिजीवियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर वर्ग, हर पेशे और हर विचारधारा के लोगों को एकजुट होकर अपने राज्य की संस्कृति, इतिहास और महापुरुषों के योगदान को पहचान देने की आवश्यकता है।
BITO (Bihar International Trade Organisations) द्वारा आयोजित इस समारोह में चित्रा त्रिपाठी जी की भागीदारी से न केवल आयोजकों का मनोबल बढ़ा, बल्कि पूरे बिहारवासियों को यह संदेश भी मिला कि उनके राज्य की अस्मिता राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचानी जा रही है।
इसलिए हम चित्रा त्रिपाठी जी के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन में उपस्थित होकर न सिर्फ श्रद्धेय रामविलास पासवान जी को श्रद्धांजलि दी, बल्कि बिहार की अस्मिता को नई पहचान दिलाने में भी अपना योगदान दिया। यह उपस्थिति आने वाले समय में युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगी।
हम आशा करते हैं कि भविष्य में भी चित्रा त्रिपाठी जी इसी तरह बिहार और देश की सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहयोग देती रहेंगी।

