बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिल्ली से वृंदावन तक चली नौ दिवसीय ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ के दौरान, लाखों अनुयायियों को सनातन धर्म और समाज की बेहतरी के लिए पांच मुख्य संकल्प दिलाए। इन संकल्पों का उद्देश्य हिंदू समाज के भीतर की कमजोरियों को दूर करना और उसे एकजुट करना था।
1. जाति-पात का भेदभाव मिटाना
धीरेंद्र शास्त्री ने सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण संकल्प जाति और छुआछूत के भेद को मिटाने का दिलाया।
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संकल्प: सभी हिंदुओं को संकल्प लेना होगा कि वे अपने समाज में जातिगत भेदभाव को समाप्त करेंगे और सभी हिंदू एक दूसरे के साथ समानता का व्यवहार करेंगे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में कोई छोटा या बड़ा नहीं है, सभी एक हैं।
2. प्रतिदिन आरती और पूजा करना
उन्होंने हिंदुओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहने और धार्मिक परंपराओं का पालन करने का आग्रह किया।
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संकल्प: हर हिंदू अपने घर में प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय आरती और पूजा करेगा। यह संकल्प परिवार को धार्मिक रूप से मजबूत बनाने और बच्चों में संस्कार डालने पर केंद्रित था।
3. अपने बच्चों को धर्म और संस्कार देना
सनातन संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए शिक्षा को अनिवार्य बताया गया।
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संकल्प: माता-पिता अपने बच्चों को सनातन धर्म की शिक्षा, संस्कृति और संस्कार अवश्य देंगे। उन्हें धर्मग्रंथों का ज्ञान देना और भारतीय मूल्यों से जोड़ना जरूरी है।
4. गौ सेवा और गौ हत्या रोकना
गाय के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने गौ सेवा को हर हिंदू का कर्तव्य बताया।
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संकल्प: सभी हिंदू अपने जीवन में यथाशक्ति गौ सेवा करेंगे और गौ हत्या को रोकने के लिए संगठित प्रयास करेंगे।
5. एक होकर सनातन धर्म का समर्थन
अंतिम संकल्प एकता और सामूहिक शक्ति को समर्पित था।
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संकल्प: सभी हिंदू एकजुट होकर एकता के साथ रहेंगे और सनातन धर्म पर आने वाले किसी भी संकट का मिलकर सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठित हिंदू समाज ही सनातन की रक्षा कर सकता है।
धीरेंद्र शास्त्री ने जोर देकर कहा कि इन पांच संकल्पों का पालन करके ही हिंदू समाज शक्तिशाली बन सकता है और देश में ‘सनातन राष्ट्र’ की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। उन्होंने भक्तों से संकल्प लेने के लिए हाथ उठाकर दोहराने का आह्वान किया।

