नोएडा: शहर के प्रतिष्ठित बैंक, Axis Bank की एक रिलेशनशिप मैनेजर की आत्महत्या ने पूरे बैंकिंग समुदाय और समाज को हिला कर रख दिया है। बॉडी शेमिंग और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर इस मैनेजर ने अपनी जान दे दी। सुसाइड नोट में उन्होंने उन लोगों के नाम और घटनाओं का खुलासा किया है जिन्होंने उन्हें इस हद तक परेशान किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैंक की रिलेशनशिप मैनेजर, सुनीता (बदला हुआ नाम), पिछले कई महीनों से ऑफिस में अपने सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार बॉडी शेमिंग का शिकार हो रही थीं। सुसाइड नोट में उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे उनकी शारीरिक बनावट को लेकर लगातार ताने मारे जाते थे और उन्हें अपमानित किया जाता था।
ऑस्ट्रेलिया से बुलावे पर बागेश्वर बाबा पहुंचे मुंबई, अनंत अंबानी का खास विमान चर्चा में
सुनीता ने सुसाइड नोट में लिखा, “मैंने कई बार इसे सहन करने की कोशिश की, लेकिन अब मेरे पास कोई और रास्ता नहीं बचा। मैंने इस बैंक में अपने करियर की शुरुआत की थी और यहां आने के बाद मैंने अपनी मेहनत और लगन से काम किया। लेकिन ऑफिस के माहौल ने मुझे अंदर से तोड़ दिया।”
सुनीता के परिवार वालों ने बताया कि उन्होंने कई बार अपनी परेशानियों के बारे में घर पर भी बताया था, लेकिन किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। सुनीता की माँ ने रोते हुए कहा, “हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारी बेटी इस तरह से हमें छोड़कर चली जाएगी। अगर हमने उसकी बातों को गंभीरता से लिया होता तो आज वह हमारे साथ होती।”
इस घटना के बाद बैंक प्रशासन और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि वे इस मामले की पूरी जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। समाज के विभिन्न वर्गों से भी इस घटना की निंदा की जा रही है। मनोवैज्ञानिकों और समाजसेवियों ने कहा है कि बॉडी शेमिंग एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने अपील की है कि सभी कार्यस्थलों पर एक स्वस्थ और सकारात्मक माहौल बनाए रखना आवश्यक है, ताकि किसी भी कर्मचारी को इस तरह की मानसिक प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
इस दुखद घटना ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या हम अपने सहकर्मियों और आस-पास के लोगों के प्रति पर्याप्त संवेदनशील हैं? सुनीता की आत्महत्या ने यह साफ कर दिया है कि हमें अपने व्यवहार और दृष्टिकोण में बदलाव लाने की जरूरत है। केवल तभी हम एक स्वस्थ और संवेदनशील समाज का निर्माण कर सकते हैं।

