मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का 10वां शपथ ग्रहण: आज बिहार में मंत्रियों की संभावित कैबिनेट सूची पर नजर
आज, बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व अध्याय जुड़ने जा रहा है, जब जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार रिकॉर्ड दसवीं बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह न केवल उनकी राजनीतिक दृढ़ता और लचीलेपन को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि बिहार की राजनीति में उनका कद आज भी कितना विशाल है। यह अवसर, हालांकि, मुख्यमंत्री के रूप में उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड से कहीं अधिक है; यह बिहार के शासन और आने वाली कैबिनेट की दिशा को निर्धारित करेगा।
शपथ ग्रहण समारोह शाम को राजभवन में होगा, और सबकी निगाहें संभावित मंत्रियों की सूची पर टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर अटकलें तेज हैं कि नीतीश कुमार अपनी नई मंत्रिपरिषद में किसे शामिल करेंगे। यह कैबिनेट, जो बीजेपी और जेडीयू गठबंधन के समीकरणों पर आधारित होगी, राज्य के प्रशासनिक और विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
गठबंधन का संतुलन और कैबिनेट का विस्तार
नई कैबिनेट में सबसे बड़ी चुनौती सीटों के बंटवारे और गठबंधन के संतुलन को बनाए रखने की होगी। चूंकि बीजेपी के पास संख्या बल अधिक है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि मंत्रिपरिषद में किस दल को कितना प्रतिनिधित्व मिलता है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के कोटे से कुछ अनुभवी चेहरे और युवा विधायक शामिल किए जा सकते हैं, जबकि जेडीयू अपने भरोसेमंद और वफादार सहयोगियों को मंत्रिमंडल में जगह देगी।
संभावित मंत्रियों की सूची (प्रारंभिक अनुमान):
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बीजेपी के प्रमुख चेहरे:
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विजय कुमार सिन्हा: विधानसभा में प्रभावी उपस्थिति के कारण इन्हें एक महत्वपूर्ण पद दिए जाने की संभावना है, संभवतः उपमुख्यमंत्री का पद।
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सम्राट चौधरी: पार्टी के भीतर पिछड़ी जाति का प्रतिनिधित्व करने वाले एक मजबूत नेता, जो गठबंधन में संतुलन बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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प्रेम कुमार: वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर इन्हें एक प्रमुख विभाग मिल सकता है।
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जेडीयू के विश्वसनीय सहयोगी:
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विजय कुमार चौधरी: नीतीश कुमार के सबसे करीबी और अनुभवी मंत्रियों में से एक, इन्हें शिक्षा या वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग दिए जा सकते हैं।
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श्रवण कुमार: जेडीयू के पारंपरिक रूप से मजबूत आधार का प्रतिनिधित्व करते हैं और मंत्रिमंडल में इनका शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है।
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लेसी सिंह: महिला प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए इन्हें जगह मिल सकती है।
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नई सरकार के सामने चुनौतियाँ
यह 10वीं बार का शपथ ग्रहण केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उस नई सरकार के लिए एक रोडमैप भी है, जिसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसमें प्रमुख हैं:
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सुशासन और विकास: राज्य में ‘सुशासन’ के वादे को आगे बढ़ाना, विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में।
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रोजगार सृजन: युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर नई सरकार को तत्काल ध्यान देना होगा।
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जाति जनगणना रिपोर्ट का क्रियान्वयन: राज्य के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर बनाई गई नीतियों को लागू करना।
नीतीश कुमार का यह रिकॉर्ड शपथ ग्रहण न केवल उनके करियर का मील का पत्थर है, बल्कि यह बिहार की भावी राजनीति और प्रशासन की दिशा भी तय करेगा। यह देखना रोमांचक होगा कि मुख्यमंत्री अपनी इस नई टीम के साथ मिलकर किस तरह से राज्य के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं।

