🇧🇩 अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण पर शेख हसीना का दो टूक जवाब: न्याय और संप्रभुता का प्रश्न
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (International Crimes Tribunal – ICT) द्वारा दिए गए हालिया बयान पर अपनी सरकार की ओर से दृढ़ और स्पष्ट प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यह बयान, जिसमें संभवतः न्यायाधिकरण की कार्यप्रणाली या उसके न्यायिक फैसलों से संबंधित कोई टिप्पणी की गई थी, बांग्लादेश की राजनीति और न्यायपालिका में एक संवेदनशील विषय है। प्रधानमंत्री हसीना ने अपने जवाब में न केवल बांग्लादेश की संप्रभुता और न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर जोर दिया, बल्कि 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए जघन्य अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए उनकी सरकार की अटल प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
संप्रभुता और न्यायिक स्वतंत्रता पर जोर
अपने बयान में, शेख हसीना ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश एक संप्रभु राष्ट्र है और उसके घरेलू न्यायिक मामले, विशेष रूप से ICT से संबंधित, देश के कानून और संविधान के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा, “ICT की स्थापना 1971 के युद्ध अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए की गई थी। यह हमारे देश की मिट्टी पर हुए सबसे बड़े अपराधों के लिए न्याय सुनिश्चित करने का हमारा आंतरिक मामला है।” उन्होंने किसी भी अंतर्राष्ट्रीय निकाय या संस्था द्वारा इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप या उसकी आलोचना को अनावश्यक बताया, जो उनके अनुसार न्याय की प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास मात्र हो सकता है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि न्यायाधिकरण ने सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की हैं, अभियुक्तों को अपनी बात रखने और अपील करने के पर्याप्त अवसर दिए गए हैं। उन्होंने आलोचकों को यह याद दिलाया कि ICT का गठन संयुक्त राष्ट्र के मानदंडों और अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, और इसके फैसलों को राजनीति से प्रेरित बताना गलत है।
पीड़ितों को न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकत
शेख हसीना ने भावनात्मक रूप से यह भी कहा कि न्याय की यह प्रक्रिया सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि 1971 के उन लाखों पीड़ितों और शहीदों के प्रति नैतिक दायित्व है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा, “वे (युद्ध अपराधी) हमारे इतिहास के सबसे काले अध्याय के लिए जिम्मेदार हैं। उन्हें दंडित करना न केवल न्याय है, बल्कि देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी आवश्यक है।”
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया कि वे ICT की प्रक्रिया पर संदेह करने के बजाय, उस त्रासदी को याद रखें जिसने बांग्लादेश के जन्म को चिह्नित किया था। उन्होंने कहा कि उनके लिए, देश की स्वतंत्रता और न्याय की स्थापना के बीच कोई समझौता नहीं हो सकता।
निष्कर्ष: न्याय की अटल राह
प्रधानमंत्री शेख हसीना का यह जवाब स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि उनकी सरकार 1971 के युद्ध अपराधों के मामलों पर किसी भी बाहरी दबाव या आलोचना के सामने नहीं झुकेगी। उनका बयान बांग्लादेश की न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करने के संकल्प को दर्शाता है, जबकि साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि देश के सबसे बड़े सामूहिक घाव, मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों, को अंततः न्याय मिले। इस बयान ने बांग्लादेश की राजनीतिक राजधानी ढाका में एक मजबूत संदेश दिया है कि न्याय की राह पर सरकार अटल है।

