राम मंदिर शिखर पर PM मोदी फहराएंगे भगवा ध्वज: अयोध्या दौरा, सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक।
अयोध्या नगरी आज एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुप्रतीक्षित अयोध्या दौरा आध्यात्मिक और राष्ट्रीय महत्व की दृष्टि से अत्यंत खास है। उनका यह दौरा मात्र एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सदियों पुराने स्वप्न के साकार होने और भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पूर्ण होने का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी आज सीधे राम जन्मभूमि परिसर पहुँचे, जहाँ उनका स्वागत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख सदस्यों ने किया। प्रधानमंत्री ने सबसे पहले गर्भगृह में प्रवेश किया और भगवान रामलला की विधिवत पूजा-अर्चना की। यह पूजा अनुष्ठान देश की एकता और समृद्धि के लिए विशेष रूप से किया गया, जिसमें वेदपाठी ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के साथ प्रधानमंत्री को अनुष्ठान संपन्न करवाया।
ध्वजारोहण: पूर्णता का प्रतीक
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक क्षण आज दोपहर 12:00 बजे हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं मंदिर के भव्य शिखर पर भगवा ध्वज फहराया। इस ध्वजारोहण को केवल एक रस्म नहीं, बल्कि राम मंदिर के निर्माण कार्य की पूर्णता और एक नए सांस्कृतिक युग के आरंभ का शंखनाद माना जा रहा है।
माना जाता है कि यह ध्वज विशेष रूप से तैयार किया गया है, जिसका कपड़ा और रंग भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। शिखर पर फहराता यह भगवा ध्वज अब करोड़ों राम भक्तों की आस्था और संघर्ष की विजय गाथा सुनाएगा। इस अवसर पर, मंदिर परिसर के ऊपर से हेलीकॉप्टरों द्वारा पुष्पवर्षा की गई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
22 जनवरी: एक अमर स्मृति
इस खास मौके पर, पूरे देश को 22 जनवरी 2024 को हुई प्राण प्रतिष्ठा समारोह की यादें ताज़ा हो गईं। उस दिन, लाखों लोगों की उपस्थिति और वैश्विक कवरेज के बीच, रामलला को उनके भव्य और दिव्य मंदिर में स्थापित किया गया था। आज का ध्वजारोहण उस ऐतिहासिक क्षण को एक प्रतीकात्मक समाप्ति देता है, यह दर्शाता है कि मंदिर अब केवल एक मूर्ति स्थापना स्थल नहीं, बल्कि एक पूर्णतः कार्यशील और राष्ट्रीय महत्व का सांस्कृतिक केंद्र बन चुका है।
इस अवसर पर अयोध्या के हर कोने को सजाया गया है। सरयू नदी के घाटों पर दीपक जलाए गए हैं, और जगह-जगह लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी जा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है, लेकिन भक्तों का उत्साह चरम पर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बाद में मंदिर निर्माण में लगे शिल्पकारों, मजदूरों और ट्रस्ट के सदस्यों से भी मुलाकात की, उनके निस्वार्थ समर्पण के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उनका यह दौरा भारतीय आस्था और गौरव को वैश्विक पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। अयोध्या अब सचमुच भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में चमक रही है।

