संविधान दिवस समारोह: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, CJI सहित दिग्गज नेताओं ने सेंट्रल हॉल और सुप्रीम कोर्ट में हिस्सा लिया
भारत ने 26 नवंबर को 76वां संविधान दिवस अत्यंत गरिमा और उत्साह के साथ मनाया। यह दिन 1949 में संविधान सभा द्वारा देश के संविधान को अपनाने की याद दिलाता है। इस अवसर पर देशभर में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन मुख्य आकर्षण नई दिल्ली का सेंट्रल हॉल और सुप्रीम कोर्ट परिसर रहे, जहां देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन हस्तियों ने हिस्सा लिया।
सेंट्रल हॉल में राष्ट्र का सम्मान
नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित मुख्य समारोह में देश के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं की उपस्थिति देखी गई। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जिन्होंने समारोह की शोभा बढ़ाई, ने संविधान के आदर्शों और नागरिकों के कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे, जिन्होंने देश की प्रगति में संविधान की मौलिक भूमिका पर जोर दिया और नागरिकों से इसके सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
समारोह में अन्य प्रमुख हस्तियों में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला शामिल थे। इन नेताओं ने संविधान के माध्यम से लोकतंत्र, न्याय और समानता के मूल्यों को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया।
राजनीतिक मतभेदों को एक तरफ रखते हुए, विपक्ष के नेताओं ने भी इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सेंट्रल हॉल में भाग लिया, जो भारतीय लोकतंत्र की एक विशेषता है कि संवैधानिक मूल्यों का सम्मान सभी राजनीतिक दलों के लिए सर्वोपरि है।
इनके अलावा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय कैबिनेट से जे.पी. नड्डा तथा किरेन रिजिजू जैसे केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति ने सेंट्रल हॉल के समारोह को और भी अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। सभी नेताओं ने मिलकर उस दस्तावेज़ को श्रद्धांजलि दी जो भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बनाता है।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका का समारोह
न्यायपालिका के लिए संविधान दिवस का महत्व सबसे अधिक है। इस अवसर पर, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित विशेष समारोह में नज़र आए। CJI ने भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्याय के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। सुप्रीम कोर्ट का यह समारोह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा और विधि के शासन को बनाए रखने के लिए न्यायपालिका की भूमिका पर केंद्रित था।
न्यायाधीशों और कानूनी बिरादरी के सदस्यों ने संविधान निर्माताओं के दृष्टिकोण को याद किया और इस बात पर विचार किया कि कैसे न्यायपालिका, संविधान की मूल संरचना की संरक्षक के रूप में, लोकतंत्र के स्तंभों को मजबूती प्रदान करती है।
कुल मिलाकर, संविधान दिवस 2025 का समारोह केवल एक वार्षिक स्मरणोत्सव नहीं था, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र की जीवंतता और सभी संवैधानिक संस्थाओं की इसके प्रति एकजुट प्रतिबद्धता का प्रमाण था। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और CJI सहित देश के सर्वोच्च नेताओं की भागीदारी ने इस दिन के महत्व को रेखांकित किया और देश को संविधान में निहित स्वतंत्रता और समानता के वादों को बनाए रखने की याद दिलाई।

