सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है।
गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने जूस पीकर अनशन तोड़ा। सरकार ने उन्हें लिखित आश्वासन दिया कि नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर संसद में चर्चा होगी और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी।
प्रमुख घटनाक्रम
- अनशन की अवधि: 28 जून से शुरू होकर 26 दिन तक चला।
- स्थान: जंतर-मंतर पर शुरू हुआ, बाद में स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग और फिर मेदांता अस्पताल में भर्ती।
- अनशन समाप्ति: 23 जुलाई की रात, केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में जूस पीकर।
- सरकार का आश्वासन:
- नीट पेपर लीक और परीक्षा सुधारों पर संसद में चर्चा।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज नहीं होंगे।
- आत्महत्या पीड़ित परिवारों को मुआवजे पर विचार।
- राजनीतिक समर्थन: 65 सांसदों ने पत्र लिखकर या मुलाकात कर अनशन खत्म करने का आग्रह किया।
प्रतिक्रियाएँ
- अरविंद केजरीवाल ने वांगचुक के फैसले का स्वागत किया और सीजेपी आंदोलन में भाग लेने की अपील की।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर वांगचुक को स्वास्थ्य का ध्यान रखने और डॉक्टरों की सलाह मानने की अपील की।
- कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनशन समाप्ति का स्वागत किया लेकिन आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
आगे की दिशा
- सरकार ने संकेत दिया है कि अगले सप्ताह संसद में नया विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें परीक्षा प्रणाली सुधार और पेपर लीक रोकने के उपाय शामिल होंगे।
- सीजेपी का विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर जारी रहेगा जब तक कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते।
सारांश
सोनम वांगचुक का अनशन खत्म होना छात्रों और आंदोलनकारियों के लिए राहत का संकेत है। सरकार ने शिक्षा सुधारों और पारदर्शिता पर चर्चा का वादा किया है, जबकि सीजेपी आंदोलन अभी भी जारी है।

