प्रधानमंत्री मोदी की ‘रोमन बाग’ घड़ी: ₹55,000 की कारीगरी जो बनी ‘मेक इन इंडिया’ का प्रतीक
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कलाई पर सजी एक खास घड़ी ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी हैं, जिसने अचानक जयपुर की एक विशिष्ट कला को वैश्विक मंच पर ला खड़ा किया है। यह घड़ी कोई विदेशी ब्रांड नहीं, बल्कि जयपुर वॉच कंपनी द्वारा निर्मित “रोमन बाग” (Roman Bagh) मॉडल है, जिसकी कीमत लगभग ₹55,000 बताई गई है। एक राष्ट्र प्रमुख द्वारा इस स्वदेशी और पारंपरिक घड़ी को पहनना, केवल फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और भारतीय कारीगरी को बढ़ावा देने का एक शक्तिशाली संदेश बन गया है।
पारंपरिक विरासत और आधुनिक लक्जरी का मिश्रण
‘रोमन बाग’ घड़ी अपनी उत्कृष्ट कारीगरी और डिजाइन के कारण खास है। यह पारंपरिक भारतीय विरासत और आधुनिक लक्जरी का एक बेहतरीन मिश्रण प्रस्तुत करती है। जयपुर वॉच कंपनी अपनी घड़ियों में भारतीय संस्कृति और इतिहास से प्रेरित तत्वों का उपयोग करने के लिए जानी जाती है, और ‘रोमन बाग’ इसका एक सुंदर उदाहरण है।
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डिज़ाइन की विशेषताएँ: इस घड़ी का डायल डिज़ाइन अक्सर भारतीय वास्तुकला या मिनिएचर पेंटिंग से प्रेरणा लेता है। इसकी रोमन अंक शैली और जटिल नक्काशी (Intricate Engraving) इसे एक विशिष्ट, राजसी रूप प्रदान करती है।
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हस्तकला पर जोर: कंपनी मशीनी उत्पादन के बजाय उच्च गुणवत्ता वाली हस्तकला (Handicraft) पर जोर देती है, जो प्रत्येक घड़ी को एक अनोखा और मूल्यवान पीस बनाती है।
प्रधानमंत्री मोदी, जो अक्सर अपने पहनावे के माध्यम से सूक्ष्म लेकिन प्रभावी संदेश देते हैं, का इस घड़ी को चुनना भारतीय कारीगरों और छोटे व्यवसायों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उनका यह कदम यह दर्शाता है कि भारतीय उत्पाद गुणवत्ता और लक्जरी के मामले में किसी भी अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड से कम नहीं हैं।
मेक इन इंडिया’ को मिली वैश्विक पहचान
जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रमुख ऐसी स्वदेशी वस्तु पहनते हैं, तो इसका प्रभाव लाखों रुपये के विज्ञापन से कहीं अधिक होता है। सोशल मीडिया पर इस घड़ी के वायरल होने से जयपुर वॉच कंपनी को अचानक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल के मूल दर्शन को मजबूती प्रदान करता है: स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना और उन्हें सम्मान दिलाना।
यह घटना भारतीय उपभोक्ताओं को भी प्रेरित करती है कि वे आयातित लक्जरी वस्तुओं पर निर्भरता कम करें और देश में उपलब्ध बेहतरीन कारीगरी और उत्पादों को महत्व दें। ₹55,000 की कीमत वाली यह घड़ी अब केवल समय बताने का उपकरण नहीं रही; यह भारतीय कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) की कहानी बन गई है।
निष्कर्ष यह है कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘रोमन बाग’ घड़ी ने एक सरल लेकिन शक्तिशाली तरीके से यह साबित कर दिया है कि भारतीय कारीगरी में विश्व स्तरीय लक्जरी का निर्माण करने की क्षमता है, और एक छोटा सा एक्सेसरी भी राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन सकता है।

