गर्मजोशी भरा स्वागत और ‘सेल्फी डिप्लोमेसी’: पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने दर्शाई अटूट भारत-रूस मित्रता
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रिय मित्र, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आगमन पर असाधारण गर्मजोशी का प्रदर्शन किया, जो दोनों देशों के बीच दशकों पुराने मजबूत रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है। राष्ट्रपति पुतिन द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन और महत्वपूर्ण वार्ताओं में भाग लेने के लिए जब नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पहुँचे, तो स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने वहाँ जाकर उनका स्वागत किया। यह व्यक्तिगत स्वागत प्रोटोकॉल से हटकर था और भारत-रूस मित्रता के महत्व को रेखांकित करता है।
एक ही कार में सफ़र: दोस्ती का विशेष संदेश
एयरपोर्ट पर औपचारिक स्वागत के बाद, दोनों शीर्ष नेताओं ने एक परंपरा स्थापित करते हुए एक ही कार में सफ़र किया। यह न केवल घनिष्ठ व्यक्तिगत केमिस्ट्री को दर्शाता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि भारत और रूस वैश्विक चुनौतियों पर एक साझा दृष्टिकोण साझा करते हैं। इस दौरान हुई अनौपचारिक बातचीत ने आगामी शिखर सम्मेलन के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया।
‘X’ पर सेल्फी और भावनात्मक संदेश
इस खास मुलाकात के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक सेल्फी साझा की, जिसमें वे और राष्ट्रपति पुतिन दोनों एक साथ नज़र आ रहे थे। इस पोस्ट में पीएम मोदी की खुशी साफ झलक रही थी।
उन्होंने भावनात्मक लहजे में लिखा, “अपने मित्र राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दिल्ली में स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। हम आज शाम और कल होने वाली बैठकों को लेकर उत्साहित हैं। भारत-रूस की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है और इससे दोनों देशों के लोगों को अत्यधिक लाभ मिला है।“
पीएम मोदी के इस पोस्ट और सेल्फी को व्यापक रूप से प्रसारित किया गया, जिसने “सेल्फी डिप्लोमेसी” के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों की ताकत को वैश्विक मंच पर उजागर किया। यह दिखाता है कि दोनों नेताओं के बीच संबंध केवल औपचारिक नहीं हैं, बल्कि यह गहरी व्यक्तिगत सम्मान और समझ पर आधारित है।
एजेंडे में क्या है?
राष्ट्रपति पुतिन की यह यात्रा दोनों देशों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन का हिस्सा है। बैठकों के एजेंडे में महत्वपूर्ण रक्षा सौदों, ऊर्जा सहयोग, अंतरिक्ष अन्वेषण, और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अलावा, वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों, जिसमें आतंकवाद का मुकाबला और बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन शामिल है, पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह विशेष मुलाकात और उससे जुड़ी गर्मजोशी, यह साबित करती है कि वैश्विक दबावों के बावजूद, भारत और रूस का रणनीतिक संबंध ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अटूट बना रहेगा।

