ऑपरेशन ‘सिंधु’: संकट के समय में भारत की एक और मानवतावादी सफलता
भारत ने एक बार फिर साबित किया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। ईरान-इज़रायल युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच, भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंधु’ चलाकर 110 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित युद्ध क्षेत्र से बाहर निकालने का सराहनीय कार्य किया है। इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि इनमें से 90 छात्र जम्मू-कश्मीर से थे, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए ईरान में रह रहे थे।
जब युद्ध की आशंका ने गंभीर रूप लिया और हालात तेजी से बिगड़ने लगे, तब भारतीय नागरिकों में डर और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। उसी समय भारत सरकार ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए ‘ऑपरेशन सिंधु’ की योजना बनाई। यह ऑपरेशन न केवल एक रणनीतिक कदम था, बल्कि एक मानवीय मिशन भी, जिसने भारतीय विदेश नीति की संवेदनशीलता और तत्परता को दर्शाया।
विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और भारतीय वायुसेना की समन्वित कार्रवाई के तहत सबसे पहले इन नागरिकों को सुरक्षित रूप से आर्मेनिया पहुंचाया गया। इसके बाद विशेष विमान की व्यवस्था कर सभी को दिल्ली लाया गया, जहाँ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में न केवल समय की बचत हुई, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया गया कि कोई नागरिक पीछे न रह जाए।
90 छात्रों का जम्मू-कश्मीर से होना अपने आप में एक संवेदनशील पहलू था। उन छात्रों के परिवारों के लिए यह समय बेहद कठिन और भावनात्मक रहा। कई परिवारों ने बताया कि उन्हें अपने बच्चों की सलामती की चिंता हर पल सताती रही। लेकिन जब उन्हें यह समाचार मिला कि उनका बेटा या बेटी सुरक्षित भारत लौट आया है, तो उनकी आंखों में राहत और गर्व दोनों देखने को मिला।
भारत सरकार की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई की प्रशंसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। कई देशों के नागरिक अभी भी युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं, वहीं भारत ने न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाला, बल्कि यह भी दर्शाया कि मानव जीवन की कीमत उसके लिए सर्वोपरि है।
‘ऑपरेशन सिंधु’ उन कई मिशनों की श्रृंखला में एक और नाम है जिसमें भारत ने समय रहते संकटग्रस्त क्षेत्रों से अपने नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला है। चाहे ‘ऑपरेशन गंगा’ (यूक्रेन युद्ध) हो, ‘ऑपरेशन कावेरी’ (सूडान संकट), या अब ‘ऑपरेशन सिंधु’, भारत ने बार-बार अपने दायित्व को बखूबी निभाया है।
यह ऑपरेशन एक बार फिर भारत की वैश्विक भूमिका, मानवीय दृष्टिकोण और राष्ट्रीय संकल्प को रेखांकित करता है — कि चाहे दुनिया के किसी भी कोने में संकट हो, भारत अपने नागरिकों को अकेला नहीं छोड़ता।

