कांग्रेस में होने और कांग्रेस का होने का फर्क—जयराम रमेश का शशि थरूर पर अप्रत्यक्ष प्रहार गहराता दल का अंतर्विरोध
हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश ने एक बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस में होना और कांग्रेस का होना, दोनों में ज़मीन-आसमान का फर्क है।” यह टिप्पणी उन्होंने बिना किसी नाम लिए की, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी के भीतर चर्चा इस ओर इशारा कर रही है कि उनका निशाना शशि थरूर पर था।
शशि थरूर, जो एक प्रखर वक्ता, लेखक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त राजनेता हैं, पिछले कुछ समय से पार्टी लाइन से हटकर अपने विचार रखने के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह कांग्रेस पार्टी के आंतरिक चुनाव हों या फिर संगठनात्मक दिशा को लेकर उनके विचार—थरूर अक्सर पार्टी के ‘परंपरावादी’ धड़े से अलग रुख अपनाते आए हैं। जयराम रमेश का बयान उसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जहां विचारधारा, नेतृत्व शैली और पार्टी के भीतर लोकतंत्र को लेकर असहमति समय-समय पर सामने आती रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस पार्टी एक गंभीर आत्ममंथन के दौर से गुजर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और युवा चेहरों के बीच खाई स्पष्ट होती जा रही है। एक तरफ राहुल गांधी जैसे नेता हैं जो भारत जोड़ो यात्रा और “पदयात्रा आधारित राजनीति” के जरिए जमीनी जुड़ाव बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ नेता, विशेषकर शशि थरूर जैसे, आधुनिक भारत के उदारवादी और वैश्विक दृष्टिकोण से पार्टी की पुनर्परिभाषा की बात करते हैं।
जयराम रमेश के बयान में “कांग्रेस का होना” उस विचारधारा और प्रतिबद्धता की ओर इशारा करता है जो पार्टी के मूलभूत सिद्धांतों से जुड़ी है—धर्मनिरपेक्ष

