सिंधु जल संधि पर भारत की सख्ती से तिलमिलाया पाकिस्तान, मंत्री ने दी परमाणु हमले की गैरजिम्मेदाराना गीदड़भभकी
भारत द्वारा सिंधु जल संधि पर अपने रुख में सख्ती लाने के संकेत के बाद पाकिस्तान में बौखलाहट साफ देखी जा रही है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने यह स्पष्ट किया है कि अब वह आतंकवाद को झेलने के मूड में नहीं है और हर स्तर पर जवाबी रणनीति अपनाने को तैयार है। इसी क्रम में भारत ने सिंधु जल संधि की समीक्षा का निर्णय लिया है, जो अब तक दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का अहम आधार रही है।
भारत के इस रुख ने पाकिस्तान को झकझोर कर रख दिया है। जहां एक ओर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने पक्ष को सही साबित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं उसके नेता गैरजिम्मेदार और उकसाने वाले बयान देने से भी पीछे नहीं हट रहे। इसी कड़ी में पाकिस्तान के रेल मंत्री हनीफ अब्बासी ने हाल ही में एक बयान में भारत को परमाणु हमले की धमकी दे डाली। उनका कहना था कि अगर भारत ने सिंधु जल संधि से पीछे हटने की कोशिश की, तो पाकिस्तान के पास “परमाणु विकल्प” भी मौजूद है।
हनीफ अब्बासी का यह बयान न केवल बेहद गैरजिम्मेदाराना है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और शांति के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन भी है। भारत ने इस बयान को गंभीरता से लिया है और इसे पाकिस्तान की हताशा और कायरता का प्रतीक बताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत अपनी नीति में संयम जरूर रखता है, लेकिन देश की सुरक्षा और हितों से कोई भी समझौता नहीं करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि पर भारत की सख्ती पूरी तरह उचित और कानूनी है। यह संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, जिसमें भारत ने अपने हिस्से के पानी का अधिकांश भाग पाकिस्तान को देने की उदारता दिखाई थी। लेकिन वर्षों से पाकिस्तान इस सद्भावना का दुरुपयोग करता आ रहा है, और अब जब भारत इस पर पुनर्विचार कर रहा है, तो पाकिस्तान को अपनी असल स्थिति का एहसास हो रहा है।
पाकिस्तान के परमाणु हमले जैसी धमकियों से भारत डरने वाला नहीं है। भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है, जो कभी पहले हमला नहीं करने की नीति पर चलता है, लेकिन अगर उस पर हमला होता है, तो उसका जवाब भी उतना ही निर्णायक होता है। पाकिस्तान को यह समझना होगा कि ऐसे बयान न केवल उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल करते हैं, बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी खतरा पैदा करते हैं।
अंततः यह स्पष्ट है कि भारत अब अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है। चाहे वह जल नीति हो या सीमा सुरक्षा, भारत की रणनीति अब स्पष्ट, सख्त और निर्णायक है। पाकिस्तान को यह समझना होगा कि गीदड़भभकियों का दौर बीत चुका है—अब कार्रवाई की भाषा में संवाद होता है।

