यूपीएससी रिजल्ट में 301वीं रैंक पर बड़ा विवाद
नई दिल्ली, 8 मार्च 2026 – संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणामों में 301वीं रैंक को लेकर अभूतपूर्व विवाद खड़ा हो गया है। दो अलग-अलग राज्यों की दो अभ्यर्थी – बिहार की आकांक्षा सिंह और उत्तर प्रदेश (गाजीपुर) की डॉ. आकांक्षा सिंह – ने एक ही रोल नंबर और रैंक पर दावा किया है।
विवाद की शुरुआत
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद बिहार की आकांक्षा सिंह को रणवीर सेना सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर सिंह की पोती बताया गया और उनके परिवार ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपनी सफलता की कहानी साझा की। इसी बीच गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह ने सामने आकर दावा किया कि 301वीं रैंक वास्तव में उनकी है, न कि बिहार वाली आकांक्षा की।
गाजीपुर की आकांक्षा का बयान
गाजीपुर की आकांक्षा ने एक वीडियो जारी कर कहा कि एडमिट कार्ड के बारकोड से सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की आकांक्षा द्वारा किया गया दावा गलत है और असली सफलता उनकी है। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे विवाद और गहरा गया।
सोशल मीडिया पर बहस
इस मामले ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। कई लोग यूपीएससी की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कुछ लोग मानते हैं कि तकनीकी जांच से ही असली अभ्यर्थी का पता चल सकेगा। ट्विटर और फेसबुक पर #UPSCControversy और #AkankshaSingh जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
यूपीएससी की भूमिका
अब सबकी निगाहें यूपीएससी पर टिकी हैं। आयोग से उम्मीद की जा रही है कि वह जल्द ही इस विवाद पर आधिकारिक बयान जारी करेगा और एडमिट कार्ड व बारकोड की जांच कर असली अभ्यर्थी की पहचान स्पष्ट करेगा।
निष्कर्ष
301वीं रैंक पर दो आकांक्षा सिंह का दावा न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि तकनीकी और प्रशासनिक पारदर्शिता कितनी जरूरी है। फिलहाल, सच्चाई बारकोड और दस्तावेजों की जांच से ही सामने आएगी।

