प्रशांत किशोर के आरोपों पर NDA का पलटवार: ‘निराधार, झूठे और बौखलाहट में दिए गए बयान’
बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर (पीके) द्वारा NDA पर लगाए गए सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने तीखा पलटवार किया है। NDA नेताओं ने पीके के आरोपों को निराधार, झूठा और अपनी पार्टी की करारी हार के बाद बौखलाहट में दिया गया बयान बताया है।
‘मानहानि’ और ‘झूठ की राजनीति’ का आरोप
NDA के प्रमुख नेताओं, जिन पर पीके ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, उन्होंने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर जवाब दिया है:
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₹100 करोड़ का मानहानि नोटिस: बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर को ₹100 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा था। पीके ने अशोक चौधरी पर 200 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। चौधरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उनकी सभी संपत्तियां सार्वजनिक डोमेन में हैं और वे सालाना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीके उनके खिलाफ “प्रेरित अभियान” चला रहे हैं क्योंकि उन्होंने पहले पीके के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया था।
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आधारहीन आरोप: उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित अन्य NDA नेताओं ने भी पीके के आरोपों को झूठा करार दिया। NDA के नेताओं का कहना है कि पीके सनसनीखेज आरोप लगाकर मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनके पास अपने दावों को साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं है।
जन सुराज की फंडिंग पर उठाए सवाल
NDA ने पलटवार करते हुए जन सुराज पार्टी के फंडिंग और उद्देश्यों पर ही सवाल खड़े किए हैं:
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‘फ्रॉड पर आधारित पॉलिटिकल स्टार्टअप’: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बिहार इकाई ने जन सुराज पार्टी को “फ्रॉड पर आधारित एक राजनीतिक स्टार्टअप” (a political startup based on fraud) करार दिया है।
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प्रमाण देने की चुनौती: NDA नेताओं ने पीके को चुनौती दी है कि यदि उनके पास सरकारी धन के दुरुपयोग के सबूत हैं तो वे उन्हें सार्वजनिक करें या जाँच एजेंसियों के सामने पेश करें। उन्होंने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सरकार है, पीके को एजेंसियों की जांच का सामना करने में डर नहीं होना चाहिए।
चुनावी स्कीम पर NDA का रुख
पीके ने महिलाओं को ₹10,000 हस्तांतरित करने की सरकारी योजना को “स्टेट-स्पॉन्सर्ड ब्राइबरी” (राज्य प्रायोजित रिश्वत) करार दिया था। इस पर NDA ने स्पष्ट किया कि यह योजना चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि पहले से चल रही एक कल्याणकारी योजना थी, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। NDA नेताओं ने कहा कि सरकारी योजनाओं के तहत लाभार्थियों को पैसे देना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे वोट खरीदने का प्रयास कहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
कुल मिलाकर, NDA ने प्रशांत किशोर के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और उन्हें अपनी हार की हताशा से उपजी ‘झूठ की राजनीति’ बताया है।

