DMRC ने मयूर विहार पॉकेट-1 स्टेशन का नाम बदलकर ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ किया, यात्रियों की सुविधा हेतु
नई दिल्ली, फरवरी 2026 – दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने राजधानी के पिंक लाइन कॉरिडोर पर स्थित मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर अब ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ कर दिया है। यह बदलाव स्टेट नेम्स अथॉरिटी (SNA) की सिफारिश पर किया गया है और इसका उद्देश्य यात्रियों की सुविधा बढ़ाना तथा भ्रम की स्थिति को दूर करना है।
नाम बदलने का कारण
सूत्रों के अनुसार, मयूर विहार क्षेत्र में पॉकेट-1 और फेज-1 जैसे मिलते-जुलते नामों के कारण यात्रियों को अक्सर भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता था। कई बार लोग गलत स्टेशन पर उतर जाते थे या यात्रा के दौरान असुविधा महसूस करते थे। इस समस्या को दूर करने के लिए स्टेशन का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे SNA ने मंजूरी दी।
राजनीतिक और सामाजिक पहलू
इसके अलावा, बीजेपी नेताओं की ओर से भी लंबे समय से स्टेशन का नाम बदलने की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि स्टेशन का नाम क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाना चाहिए। इसी क्रम में स्टेशन का नया नाम ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ रखा गया है, जो स्थानीय भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
स्टेट नेम्स अथॉरिटी की भूमिका
स्टेट नेम्स अथॉरिटी (SNA) दिल्ली सरकार के तहत कार्यरत एक 29 सदस्यीय निकाय है। यह राजधानी में सड़कों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थलों के नामकरण पर निर्णय लेता है। इस निकाय ने यात्रियों की सुविधा और स्थानीय मांगों को ध्यान में रखते हुए नाम परिवर्तन की सिफारिश की थी।
यात्रियों की प्रतिक्रिया
स्टेशन का नाम बदलने के बाद यात्रियों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दी हैं। कुछ लोगों ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है, क्योंकि इससे भ्रम की स्थिति दूर होगी और स्टेशन की पहचान स्पष्ट होगी। वहीं, कुछ यात्रियों का मानना है कि नाम बदलने से उन्हें नए नाम को अपनाने में समय लगेगा।
DMRC का बयान
DMRC अधिकारियों ने कहा कि यह बदलाव यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि स्टेशन पर सभी साइनबोर्ड, घोषणाएँ और डिजिटल डिस्प्ले जल्द ही नए नाम के साथ अपडेट कर दिए जाएंगे।
निष्कर्ष
मयूर विहार पॉकेट-1 स्टेशन का नाम बदलकर ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ करना न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि यह स्थानीय सांस्कृतिक भावनाओं को भी सम्मान देता है। दिल्ली मेट्रो में यह बदलाव यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और भ्रम की स्थिति को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

