जेपी की जन्मभूमि से उठेगी बदलाव की आँधी, सिताब दियारा से 20 मई को शुरू होगी बिहार बदलाव यात्रा
बिहार की राजनीति एक बार फिर एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। 20 मई 2025 से सारण जिले के सिताब दियारा में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि से ‘बिहार बदलाव यात्रा’ की शुरुआत होने जा रही है। यह यात्रा केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन बनने की ओर अग्रसर है, जो बिहार की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दशा-दिशा को बदलने का संकल्प लेकर निकलेगी।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण, जिनका जीवन संघर्ष और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित रहा, उनके विचार और आंदोलन आज भी बिहार के जनमानस में जीवित हैं। ऐसे महान क्रांतिकारी की धरती से परिवर्तन की यात्रा आरंभ करना एक प्रतीकात्मक और शक्तिशाली संदेश है। सिताब दियारा, जो आज भी विकास की मुख्यधारा से काफी हद तक दूर है, वहीं से अब नई उम्मीदों की एक लहर उठेगी।
यात्रा की शुरुआत 20 मई को दोपहर 3 बजे लोकनायक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय स्मारक से होगी। यह तीन दिवसीय यात्रा 22 मई तक चलेगी और मुख्य रूप से सारण जिले की मांझी और एकमा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इस दौरान यात्रा में भाग लेने वाले कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र, युवा और ग्रामीण जनता से संवाद करेंगे और राज्य की जमीनी समस्याओं को समझने और उठाने का काम करेंगे।
बिहार बदलाव यात्रा का उद्देश्य केवल राजनीतिक समर्थन जुटाना नहीं है, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना, समझना और उनके समाधान की दिशा में एक ठोस खाका तैयार करना है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, पलायन, कृषि संकट और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे केंद्र में होंगे। यह यात्रा उन लोगों को मंच देने का प्रयास है, जिनकी आवाजें अक्सर राजनीतिक शोर में दबा दी जाती हैं।
यात्रा के आयोजकों का कहना है कि यह अभियान एक नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत करेगा, जो सत्ता की नहीं, सेवा की राजनीति पर आधारित होगी। यह युवाओं को राजनीति से जोड़ने और उन्हें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने का माध्यम भी बनेगा।
सिताब दियारा से उठने वाली यह बदलाव की आंधी अगर पूरे बिहार में फैलती है, तो यह लोकनायक जयप्रकाश नारायण के अधूरे सपनों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। बिहार, जो कभी देश को दिशा देने वाला राज्य माना जाता था, आज भी उसी क्षमता और चेतना से भरा है। आवश्यकता है तो केवल उस चेतना को जगाने की—और ‘बिहार बदलाव यात्रा’ उसी दिशा में एक सार्थक पहल है।
यह यात्रा केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि बिहार के लिए एक नए युग की दस्तक है—एक ऐसा युग जहाँ सत्ता नहीं, सेवा ही लक्ष्य होगा।

