कोरोना की वापसी: NB.1.8.1 और LF.7 वेरिएंट ने बढ़ाई चिंता, कई राज्यों में केस तेजी से बढ़े
देश में एक बार फिर कोरोना वायरस की आहट सुनाई देने लगी है। जहां लोग यह मान चुके थे कि कोविड-19 का खतरा अब पीछे छूट चुका है, वहीं नए वेरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 ने एक बार फिर स्वास्थ्य महकमे और आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन वेरिएंट्स की मौजूदगी वायरस के लगातार बदलते स्वरूप का संकेत है, जो लापरवाही के माहौल में एक बार फिर संक्रमण की लहर को जन्म दे सकता है।
तमिलनाडु और गुजरात में सबसे पहले इन नए वेरिएंट्स की पहचान हुई है। इसके बाद दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी कोरोना केसों में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। हाल ही में जारी हुई स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इन राज्यों में एक्टिव केसों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। हालांकि अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन संक्रमण की रफ्तार को देखकर विशेषज्ञ पहले से सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
NB.1.8.1 और LF.7 दोनों ही वेरिएंट्स ओमिक्रॉन की सब-वेरिएंट्स माने जा रहे हैं। इनकी संक्रमण फैलाने की क्षमता अधिक है, हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये पहले के वेरिएंट्स की तुलना में अधिक खतरनाक हैं या नहीं। कुछ मरीजों में हल्के लक्षण जैसे बुखार, खांसी, गले में खराश और कमजोरी देखी गई है, लेकिन बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए ये वेरिएंट घातक साबित हो सकते हैं।
दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में केसों की संख्या बढ़ने से सरकार ने टेस्टिंग और निगरानी को फिर से सक्रिय कर दिया है। एयरपोर्ट्स पर विदेश से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग भी बढ़ाई जा रही है। राज्यों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और अस्पतालों में कोविड बेड्स, ऑक्सीजन सप्लाई और दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा की जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम, भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में मास्क की अनदेखी और टीकाकरण की सुस्ती इस उभरते खतरे को बढ़ावा दे रही है। लोग पहले की तरह सतर्क नहीं हैं और यही लापरवाही नए वेरिएंट्स को फैलने का अवसर दे रही है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि मास्क का प्रयोग फिर से शुरू किया जाए, भीड़भाड़ से बचा जाए और यदि लक्षण दिखें तो तुरंत टेस्ट कराएं।
केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे जीनोम सिक्वेंसिंग पर जोर दें और कोविड प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, बूस्टर डोज़ लगवाने के लिए जनजागरूकता अभियान शुरू करने की योजना भी बनाई जा रही है।
हालांकि स्थिति अभी गंभीर नहीं है, लेकिन अगर सतर्कता नहीं बरती गई, तो आने वाले दिनों में हालात बिगड़ सकते हैं। यह वक्त है जब हर नागरिक को जिम्मेदारी से व्यवहार करना होगा, ताकि देश फिर से एक और महामारी की लहर से बच सके।

