चर्चित लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने बीजेपी की सदस्यता लेकर अलीनगर से चुनावी मैदान में किया प्रवेश
लोकप्रिय लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने बीते मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर राजनीतिक गलियारे में अपने कदम रख दिए हैं। इसके मात्र एक दिन बाद, यानी बुधवार को ही पार्टी ने उन्हें बिहार के अलीनगर विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। यह घोषणा 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में मैथिली ठाकुर को सबसे कम उम्र की कैंडिडेट बनाती है, जिससे उनकी राजनीतिक यात्रा को लेकर खासा उत्साह और चर्चा दोनों पैदा हो गई है।
मैथिली ठाकुर का नाम पारंपरिक और लोकसंगीत की दुनिया में लंबे समय से जाना जाता है। उनकी मधुर आवाज और सांस्कृतिक धरोहर को बचाए रखने की दिशा में उनके प्रयासों ने उन्हें देशभर में लाखों लोगों का दिल जितने में मदद की है। सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है, खासकर युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता देखते ही बनती है। उनकी इस लोकप्रियता को राजनीतिक दायरे में भी उपयोगी माना जा रहा है।
बीजेपी की तरफ से अलीनगर से टिकट मिलने के बाद मैथिली ठाकुर ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि वह इस जिम्मेदारी को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए एक नया अध्याय है। मैं अपने संगीत से जितना जुड़ी रही, उतना ही अब अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा के लिए भी समर्पित रहूंगी। राजनीति में आने का फैसला मेरे लिए केवल पद या प्रतिष्ठा पाने का माध्यम नहीं, बल्कि एक अवसर है जिससे मैं अपने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकूं।”
मैथिली ने यह भी कहा कि उन्हें बिहार के युवाओं और महिलाओं से मिलने वाले समर्थन और विश्वास ने राजनीति की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। उनका मानना है कि युवा शक्ति को सही दिशा देने के लिए उनकी आवाज़ लोकसभा या विधानसभा तक भी पहुँचनी चाहिए ताकि वे जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठा सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मैथिली ठाकुर का भाजपा में शामिल होना और उनके चुनाव मैदान में उतरने का मतलब पार्टी की युवा और सांस्कृतिक सोच को बढ़ावा देना है। यह कदम भाजपा के लिए भी लाभकारी हो सकता है क्योंकि मैथिली का फॉलोइंग खासकर उन मतदाताओं के बीच है जो पारंपरिक राजनीति से दूर रहते हैं लेकिन लोकसंस्कृति और युवा नेताओं को पसंद करते हैं।
अलीनगर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला काफी रोचक होने की संभावना है। मैथिली ठाकुर के सामने बड़े और अनुभवी राजनीतिक चेहरे होंगे, लेकिन उनकी युवा ऊर्जा, सांस्कृतिक पहचान और लोकप्रियता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।
बिहार चुनाव 2025 में मैथिली ठाकुर के नामांकन से यह भी स्पष्ट हो गया है कि राजनीति में अब सिर्फ अनुभव या वंशवाद ही अहम नहीं रहा, बल्कि नए और युवा चेहरों को मौका देने का दौर भी शुरू हो चुका है। इससे पूरे राज्य की राजनीति में नयापन आने की उम्मीद जताई जा रही है।
अंततः, मैथिली ठाकुर के इस राजनीतिक सफर की शुरुआत से बिहार की राजनीति में एक नई हवा के आने की संभावना है। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि उनकी संगीत की प्रसिद्धि और जनसमर्थन उन्हें विधानसभा तक कैसे ले जाता है और वे जनता की अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती हैं।