प्रशांत किशोर की रणनीति: मनीष कश्यप का दावा कि वही बिहार को रिवर्स से टॉप गियर में ला सकते हैं

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प्रशांत किशोर की रणनीति: मनीष कश्यप का दावा कि वही बिहार को रिवर्स से टॉप गियर में ला सकते हैं

बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब यूट्यूबर और पत्रकार मनीष कश्यप ने यह बड़ा दावा किया कि प्रशांत किशोर ही वह शख्स हैं जो बिहार को “रिवर्स गियर” से निकालकर “टॉप गियर” में ला सकते हैं। यह बयान न सिर्फ चर्चा में आया, बल्कि इसने राज्य की राजनीतिक हलचलों में नई ऊर्जा भर दी।

मनीष कश्यप का यह दावा उस वक्त और महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम बिहार की वर्तमान स्थिति पर नज़र डालते हैं। बेरोज़गारी, पलायन, शिक्षा की गिरती गुणवत्ता, और बुनियादी ढांचे की कमी जैसे मुद्दों ने बिहार को विकास की दौड़ में काफी पीछे छोड़ दिया है। मनीष का मानना है कि प्रशांत किशोर के पास वो दृष्टिकोण, योजना और कार्यशैली है जो बिहार को एक नई दिशा दे सकती है।

प्रशांत किशोर, जिन्हें आमतौर पर एक रणनीतिकार और चुनावी मैनेजर के रूप में जाना जाता है, ने पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में चुनाव जीतने में बड़ी भूमिका निभाई है। चाहे वह नरेंद्र मोदी की 2014 की ऐतिहासिक जीत हो या फिर ममता बनर्जी की वापसी – प्रशांत किशोर की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। लेकिन बिहार के संदर्भ में बात अलग है। यहां उन्होंने चुनावी रणनीति से हटकर जनसंपर्क और सामाजिक बदलाव की बात शुरू की है।

उनकी ‘जन सुराज’ यात्रा इसका उदाहरण है, जहां उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और एक रोडमैप तैयार करने की कोशिश की। यह पहल एक परंपरागत नेता से अलग दृष्टिकोण को दर्शाती है। मनीष कश्यप भी इसी दृष्टिकोण से प्रभावित दिखते हैं और इसलिए उन्होंने प्रशांत किशोर को बिहार की राजनीति के लिए ‘उम्मीद की किरण’ बताया।

मनीष का यह भी कहना है कि बिहार को सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सोच और व्यवस्था परिवर्तन की ज़रूरत है। उनका मानना है कि प्रशांत किशोर जैसे व्यक्ति, जो राजनीति में किसी परिवारवाद या जातिवाद के सहारे नहीं आए, बल्कि अपने विचार और कार्यशैली से पहचाने गए, वही सच्चे बदलाव के वाहक बन सकते हैं।

हालांकि, आलोचकों का मानना है कि बिहार की जमीनी राजनीति इतनी आसान नहीं है। जातीय समीकरण, सामाजिक संरचना और राजनीतिक परंपराएं किसी भी नए प्रयोग को आसान नहीं बनने देतीं। लेकिन मनीष कश्यप का विश्वास अडिग है। वे मानते हैं कि अगर सही नेतृत्व मिले, तो बिहार सिर्फ विकास की राह पकड़ सकता है, बल्कि देश के लिए एक उदाहरण भी बन सकता है।

अंततः यह तो आने वाला समय बताएगा कि प्रशांत किशोर बिहार को रिवर्स से टॉप गियर में लाने में कितने सफल होते हैं। लेकिन मनीष कश्यप का यह समर्थन यह जरूर दिखाता है कि जनता अब विकल्पों की तलाश में है – एक नए सोच, नए दिशा और नए नेतृत्व की।


PM Modi Highlights Global Inequality at BRICS Summit, Urges Fair Treatment for Global South and Calls Out Western Double Standards.

बिहार की जनता किसे चुनेगी अगला मुख्यमंत्री? नई राजनीतिक हवा में कौन बनेगा नेतृत्व का चेहरा?

प्रसिद्ध न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी जी का आभार, जिन्होंने “बिहार अस्मिता दिवस” में आकर श्रद्धेय पासवान जी को श्रद्धांजलि दी।


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